भारतीय रेलवे ने बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया है। देश का रेल नेटवर्क अब 99.2 प्रतिशत ब्रॉड गेज विद्युतीकरण के स्तर तक पहुंच चुका है। इस उपलब्धि के साथ भारतीय रेलवे ने ब्रिटेन, रूस और चीन जैसे कई बड़े देशों के रेल नेटवर्क को पीछे छोड़ दिया है।
रेल मंत्रालय के अनुसार, यह विद्युतीकरण अभियान बीते कुछ वर्षों से मिशन मोड में चलाया जा रहा है। संसद में दी गई जानकारी में बताया गया कि वर्ष 2014 के बाद से अब तक 46,000 किलोमीटर से अधिक रेलवे लाइनों का विद्युतीकरण किया जा चुका है, जो आज़ादी के बाद के कई दशकों की तुलना में कहीं अधिक तेज़ गति को दर्शाता है।
वैश्विक तुलना में भारत आगे
आंकड़ों के मुताबिक,
ब्रिटेन का रेलवे नेटवर्क लगभग 40 प्रतिशत,
रूस का करीब 50 प्रतिशत,
और चीन का लगभग 80 प्रतिशत ही विद्युतीकृत है।
इसके मुकाबले भारत का 99.2 प्रतिशत आंकड़ा देश को विश्व के सबसे अधिक विद्युतीकृत रेल नेटवर्क में शामिल करता है।
ज़ोन और राज्यों में तेज़ प्रगति
देश के 14 से अधिक रेलवे ज़ोन पूरी तरह 100 प्रतिशत विद्युतीकृत हो चुके हैं। वहीं कई अन्य ज़ोन भी अंतिम चरण में हैं। इसके अलावा 25 से ज्यादा राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ऐसे हैं, जहां ब्रॉड गेज रेलवे लाइनों का पूर्ण विद्युतीकरण हो चुका है।
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को लाभ
रेलवे लाइनों के विद्युतीकरण से न केवल डीज़ल पर निर्भरता कम हुई है, बल्कि इससे
ईंधन की बचत,
परिचालन लागत में कमी,
और कार्बन उत्सर्जन घटाने
जैसे बड़े फायदे भी सामने आए हैं। यह कदम भारत के हरित और टिकाऊ परिवहन लक्ष्य की दिशा में अहम माना जा रहा है।
आगे की योजना
रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में बनने वाली सभी नई रेल लाइनों और दोहरीकरण परियोजनाओं में शुरू से ही विद्युतीकरण शामिल किया जाएगा, ताकि यह उपलब्धि स्थायी बनी रहे।
कुल मिलाकर, भारतीय रेलवे का यह सफर न केवल तकनीकी क्षमता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि भारत अब वैश्विक इंफ्रास्ट्रक्चर मानकों पर मजबूती से खड़ा है।