–राजेश नरवरिया
भारतीय जनता पार्टी ने हाल के दिनों में कुछ ऐसे फैसले किए हैं, जिन्होंने न केवल राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ाई है, बल्कि विपक्ष को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। पार्टी द्वारा नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपना ऐसा ही एक निर्णय है, जिसने संगठन के भीतर भरोसे को मजबूत किया है और बाहर राजनीतिक हलचल पैदा की है।
आज के दौर में, जब राजनीति अक्सर जाति और परिवार के इर्द-गिर्द सिमटती नजर आती है, ऐसे समय में किसी सामान्य पृष्ठभूमि से आए नेता को शीर्ष संगठनात्मक भूमिका देना अपने आप में एक संदेश है। यह संकेत देता है कि बीजेपी में योग्यता, संगठन के प्रति समर्पण और निरंतर कार्य को प्राथमिकता दी जाती है। यही वजह है कि इस फैसले को पार्टी के एक नए सोच वाले प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है।
बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया था कि मतदाता अब केवल जातीय समीकरणों के आधार पर निर्णय नहीं ले रहे हैं। बीजेपी ने इस संदेश को समझा और संगठनात्मक स्तर पर उसे लागू करने का प्रयास किया। नितिन नबीन का चयन इसी बदलते राजनीतिक मिज़ाज की झलक है। यह पार्टी में पीढ़ीगत परिवर्तन का भी संकेत देता है, जहां वर्षों की मेहनत और निष्ठा को पहचान मिलती है।
बीजेपी में संगठन को व्यक्ति से ऊपर माना जाता है। यही कारण है कि यहां ऐसे फैसले संभव हो पाते हैं, जो पहली नजर में चौंकाने वाले लगते हैं। पार्टी का ढांचा सामूहिक नेतृत्व और साझा जिम्मेदारी पर आधारित है, जिससे नए प्रयोग करने का आत्मविश्वास बनता है। नितिन नबीन का राजनीतिक सफर भी इसी संगठनात्मक संस्कृति का उदाहरण है।
यह निर्णय केवल नए कार्यकर्ताओं के लिए ही नहीं, बल्कि वरिष्ठ नेताओं के लिए भी एक संदेश है कि पार्टी में हर स्तर पर काम और आचरण पर नजर रखी जाती है। समर्पण और जिम्मेदारी का सम्मान किया जाता है। जिस समय नितिन नबीन को नई जिम्मेदारी की सूचना मिली, वे अपने विधानसभा क्षेत्र में पार्टी कार्यकर्ताओं को सम्मानित कर रहे थे। यह दृश्य उनके संगठन के प्रति जुड़ाव को दर्शाता है।
बीजेपी के इतिहास में इस तरह के फैसले पहले भी होते रहे हैं। जब नरेंद्र मोदी को मुख्यमंत्री और बाद में प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया था, तब भी ऐसे ही सवाल उठे थे। लेकिन समय के साथ इन फैसलों को जनता ने स्वीकार किया और समर्थन भी दिया। इससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी नेतृत्व जोखिम उठाने से नहीं हिचकता, यदि उसे नेतृत्व की क्षमता पर भरोसा हो।
विपक्षी दल, विशेषकर कांग्रेस, लगातार जातिगत विमर्श को आगे बढ़ाने की कोशिश करते नजर आते हैं। इसके विपरीत, बीजेपी का यह कदम राजनीति को एक व्यापक और सकारात्मक दिशा में ले जाने का प्रयास लगता है। संगठन में विभिन्न वर्गों और समुदायों की भागीदारी को लेकर पार्टी का दृष्टिकोण अपेक्षाकृत संतुलित दिखाई देता है।
बीजेपी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के रूप में एक ऐसा मार्गदर्शक भी मिलता है, जो जमीनी स्तर पर नेताओं और कार्यकर्ताओं के कार्य, व्यवहार और प्रतिबद्धता का आकलन करता रहता है। इसी निरंतर मूल्यांकन प्रक्रिया के कारण पार्टी समय-समय पर ऐसे निर्णय ले पाती है।
नितिन नबीन वर्तमान में बिहार सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं। इस विभाग में रहते हुए साफ छवि बनाए रखना आसान नहीं माना जाता, लेकिन उन्होंने इस चुनौती को सफलतापूर्वक निभाया है। यही कारण है कि राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी गई।
आज की राजनीति में बीजेपी एक केंद्रीय धुरी के रूप में उभरी है। उसके निर्णय और प्रयोग बाकी दलों के लिए भी नई सोच का आधार बनते जा रहे हैं। नितिन नबीन को दी गई जिम्मेदारी इस बात का संकेत है कि पार्टी भविष्य की राजनीति को योग्यता, प्रदर्शन और संगठनात्मक मजबूती के आधार पर गढ़ना चाहती है।
कुल मिलाकर, यह नया प्रयोग युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने, परिवारवाद और संकीर्ण राजनीति से आगे निकलने तथा एक अधिक समावेशी और सकारात्मक राजनीतिक संस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक कदम माना जा सकता है। बदलते भारत की राजनीति में पुराने तरीकों से मुकाबला करना अब शायद आसान नहीं रह गया है।