भारत के ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तान का बड़ा कबूलनामा सामने आया है। करीब 7 महीने बाद पाकिस्तान ने पहली बार आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है कि भारतीय हमलों में उसका नूर खान एयरबेस क्षतिग्रस्त हुआ था। यह एयरबेस पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के बेहद करीब स्थित है और वायुसेना के लिहाज से रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने मीडिया से बातचीत में माना कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय ड्रोन और मिसाइल हमलों से एयरबेस के इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा और कई सैनिक घायल हुए।
ड्रोन और मिसाइल स्ट्राइक से हुआ नुकसान
इशाक डार के अनुसार, भारत की ओर से सीमित समय में बड़े पैमाने पर ड्रोन ऑपरेशन चलाए गए थे। पाकिस्तान ने अधिकांश ड्रोन को रोकने का दावा किया, लेकिन एक ड्रोन नूर खान एयरबेस तक पहुंचने में सफल रहा, जिससे वहां स्थित सैन्य ढांचे को नुकसान हुआ।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्वीकारोक्ति इस बात का संकेत है कि भारत की प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता और आधुनिक हथियार प्रणालियां अब दुश्मन के गहरे इलाकों तक प्रभावी ढंग से वार करने में सक्षम हैं।
क्या है ऑपरेशन सिंदूर?
ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में उस समय शुरू किया गया था, जब जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाया। इस सैन्य अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों और सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया।
भारत की रणनीति स्पष्ट थी—आतंकवाद के समर्थन ढांचे को नुकसान पहुंचाना और भविष्य की किसी भी दुस्साहसिक कार्रवाई को रोकना।
नूर खान एयरबेस क्यों है अहम?
नूर खान एयरबेस, जिसे पहले चकलाला एयरबेस के नाम से जाना जाता था, पाकिस्तान वायुसेना के प्रमुख ठिकानों में शामिल है। यह न केवल इस्लामाबाद और रावलपिंडी के करीब स्थित है, बल्कि यहां से सैन्य और वीआईपी उड़ानों का संचालन भी किया जाता है।
रक्षा जानकारों के मुताबिक, इस एयरबेस को नुकसान पहुंचना पाकिस्तान की एयर डिफेंस और आंतरिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पहले इनकार, अब स्वीकारोक्ति
ऑपरेशन के तुरंत बाद पाकिस्तान ने किसी भी बड़े नुकसान से इनकार किया था। हालांकि, अब 7 महीने बाद आया यह बयान न सिर्फ पहले के दावों को कमजोर करता है, बल्कि भारत के सैन्य अभियान की प्रभावशीलता की पुष्टि भी करता है।