ईरान और अमेरिका के बीच का तनाव अब मिसाइलों से आगे बढ़कर ‘डिजिटल वार’ तक पहुंच गया है। ईरान ने गूगल, अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी टेक कंपनियों को अपनी ‘हिट लिस्ट’ में डाल दिया है। बहरीन और यूएई में अमेजन के डेटा सेंटर्स पर हुए हमलों ने दुनिया भर के इंटरनेट सिस्टम में हड़कंप मचा दिया है।
एक ऐसी जंग, जिसमें मिसाइलें नहीं, ‘डेटा’ गिरेगा!
कल्पना कीजिए कि एक सुबह आप उठें और आपका बैंकिंग ऐप, व्हाट्सएप और गूगल मैप्स सब काम करना बंद कर दे। आपको लगेगा कि शायद नेटवर्क की समस्या है, लेकिन असलियत यह होगी कि समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल काट दी गई हैं और दुनिया का सारा डेटा स्टोर करने वाले विशाल सर्वर रूम्स पर हमले हो रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष अब इसी डरावने मोड़ पर आ खड़ा हुआ है।
ईरान की ‘हिट लिस्ट’ में गूगल, अमेजन और एप्पल
मार्च 2026 की ताजा रिपोर्ट्स ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। ईरान ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि गूगल, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया (Nvidia) और एप्पल अब उसके ‘जायज निशाने’ (Legitimate Targets) हैं। ईरान का आरोप है कि ये कंपनियां अपनी क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीकों के जरिए इजरायल और अमेरिका को ईरान के सैन्य ठिकानों की सटीक जानकारी दे रही हैं।
अमेजन डेटा सेंटर्स पर ड्रोन हमले: क्या यह शुरुआत है?
यह सिर्फ खोखली धमकी नहीं है। खबर है कि बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में स्थित Amazon Web Services (AWS) के ठिकानों पर ईरान के आत्मघाती ड्रोनों ने हमला किया है। इन हमलों में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे कई घंटों तक क्लाउड सेवाएं ठप रहीं। अगर ये हमले बड़े पैमाने पर होते हैं, तो दुनिया का डिजिटल बैंकिंग और संचार सिस्टम ताश के पत्तों की तरह ढह सकता है।
लाल सागर (Red Sea): अगला बड़ा बैटलफील्ड
जमीन के साथ-साथ अब समुद्र के नीचे भी खतरा मंडरा रहा है। ईरान ने लाल सागर के नीचे से गुजरने वाली उन इंटरनेट केबल्स को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी है, जिनसे दुनिया का 95% इंटरनेट ट्रैफिक गुजरता है। यदि ये केबल्स काटी जाती हैं, तो भारत समेत कई देशों में हफ्तों तक ‘इंटरनेट ब्लैकआउट’ (Internet Blackout) हो सकता है।
‘प्रोजेक्ट निंबस’ और टेक कर्मचारियों को चेतावनी
ईरान का मानना है कि ‘प्रोजेक्ट निंबस’ जैसे AI टूल्स का इस्तेमाल करके ही उसके बड़े नेताओं और सैन्य ठिकानों को ट्रैक किया गया है। ईरान ने इन कंपनियों के कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी है कि वे अपने दफ्तरों से कम से कम 1 किलोमीटर दूर रहें। ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच बढ़ता यह टकराव अब ‘सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम’ की जंग बन चुका है।
निष्कर्ष: क्या हम डिजिटल अंधेरे की ओर बढ़ रहे हैं?
यह लड़ाई अब सिर्फ दो देशों के बीच नहीं रही, बल्कि इसमें आपकी और हमारी डिजिटल लाइफ भी शामिल हो गई है। अगर ईरान अपने मंसूबों में कामयाब होता है, तो इसका असर केवल अमेरिका पर नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति पर पड़ेगा जो स्मार्टफोन का इस्तेमाल करता है। क्या यह वाकई तीसरे विश्व युद्ध की डिजिटल शुरुआत है? इसका जवाब आने वाला वक्त ही देगा।