नई दिल्ली: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के पति और कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा (Robert Vadra) की कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार (15 अप्रैल 2026) को हरियाणा के शिकोहपुर (गुरुग्राम) भूमि सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर आरोप पत्र (Chargesheet) पर संज्ञान ले लिया है।
16 मई को कोर्ट में पेशी के निर्देश
राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश सुशांत चांगोत्रा ने ED की दलीलों को सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने रॉबर्ट वाड्रा और इस मामले के अन्य आरोपियों को 16 मई 2026 को अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2008 में गुरुग्राम के शिकोहपुर (अब सेक्टर 83) में हुए एक लैंड डील से जुड़ा है:
- खरीद: वाड्रा की कंपनी ‘स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड’ ने 3.5 एकड़ जमीन ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी।
- बिक्री: चार साल बाद, सितंबर 2012 में इसी जमीन को रियल एस्टेट दिग्गज DLF को 58 करोड़ रुपये में बेच दिया गया।
- आरोप: ED का आरोप है कि इस लेनदेन में मनी लॉन्ड्रिंग हुई है और अवैध तरीके से करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाया गया। जांच एजेंसी ने लगभग 58 करोड़ रुपये को ‘अपराध की कमाई’ (Proceeds of Crime) करार दिया है।
पहली बार दायर हुई है क्रिमिनल चार्जशीट
गौरतलब है कि यह पहला मौका है जब किसी केंद्रीय जांच एजेंसी ने 57 वर्षीय रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ आपराधिक मामले में चार्जशीट दाखिल की है। ED ने पिछले साल जुलाई में यह आरोप पत्र दाखिल किया था। इससे पहले अप्रैल 2025 में भी वाड्रा से तीन दिनों तक लंबी पूछताछ की गई थी।
राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप
रॉबर्ट वाड्रा शुरू से ही इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं। उनका और कांग्रेस पार्टी का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई “राजनीतिक प्रतिशोध” (Political Vendetta) है और उनके परिवार को निशाना बनाने के लिए जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है।