असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान से ठीक पहले राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा (Pawan Khera) के खिलाफ असम पुलिस ने कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। यह कार्रवाई असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराई गई FIR के बाद शुरू हुई है।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पवन खेड़ा ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए थे। खेड़ा ने दावा किया था कि सीएम की पत्नी के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं और उनके पास दुबई में अघोषित संपत्ति है। कांग्रेस ने मांग की थी कि चुनाव आयोग मुख्यमंत्री का नामांकन रद्द करे क्योंकि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में इन संपत्तियों की जानकारी छिपाई है।
सीएम हिमंता बिस्वा सरमा का पलटवार
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे “पाकिस्तान प्रायोजित दुष्प्रचार” करार दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनाव हारने के डर से अब निजी हमलों और फर्जी दस्तावेजों का सहारा ले रही है।
”मेरी पत्नी और मैं पवन खेड़ा के खिलाफ आपराधिक और दीवानी मानहानि का मामला दर्ज कर रहे हैं। उन्हें अपने लापरवाह बयानों के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।” – हिमंता बिस्वा सरमा, मुख्यमंत्री, असम
पुलिसिया कार्रवाई और कानूनी दांवपेच
ताजा अपडेट के अनुसार, असम पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस मामले में जांच तेज कर दी है।
- FIR दर्ज: रिनिकी भुइयां सरमा ने फर्जी दस्तावेज पेश करने और मानहानि के आरोप में शिकायत दर्ज कराई है।
- जांच की सुगबुगाहट: खबरें हैं कि असम पुलिस की एक टीम पवन खेड़ा से पूछताछ के लिए दिल्ली का रुख कर सकती है।
- कांग्रेस का स्टैंड: कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री को चुनौती दी है कि अगर आरोप गलत हैं तो वे भगवत गीता पर हाथ रखकर कसम खाएं।
असम चुनाव 2026 पर असर
असम में 9 अप्रैल, 2026 को मतदान होना है। चुनाव से ठीक 2-3 दिन पहले इस तरह के हाई-प्रोफाइल विवाद ने मतदाताओं के बीच हलचल पैदा कर दी है। जहां बीजेपी इसे अपनी छवि खराब करने की साजिश बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी सबसे बड़ी चोट मान रही है।
निष्कर्ष
पवन खेड़ा और असम पुलिस के बीच यह खींचतान कोई नई नहीं है; इससे पहले भी एक विवादित बयान के बाद उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर रोका गया था। अब देखना यह होगा कि 2026 के इन चुनावों में ‘पासपोर्ट और प्रॉपर्टी’ का यह मुद्दा किस पार्टी की नैया पार लगाता है।