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यश के रावण की डबिंग करना शरद केलकर के लिए क्यों था मुश्किल? बताया अपना अनुभव

By · November 7, 2026 · 11:32 am · 8 min read

यश के रावण की डबिंग शरद केलकर के लिए क्यों थी मुश्किल? बताया अनुभव

मुंबई। फिल्म ‘रामायण’ में रावण का किरदार निभा रहे अभिनेता यश की हिंदी आवाज शरद केलकर ने दी है। अब शरद केलकर ने इस डबिंग से जुड़े अनुभव साझा करते हुए बताया कि यह उनके करियर के सबसे थकाने वाले और चुनौतीपूर्ण कामों में से एक रहा। उन्होंने यश की मेहनत और किरदार को पर्दे पर उतारने के उनके प्रयासों की भी सराहना की।

एक इंटरव्यू में शरद केलकर ने बताया कि फिल्म के निर्देशक नितेश तिवारी और उनकी टीम ने यश के हिंदी संस्करण के लिए उन्हें आवाज देने की जिम्मेदारी सौंपी थी। शरद पहले भी निर्देशक के साथ काम करना चाहते थे और इस फिल्म के जरिए उन्हें यह अवसर मिला।

यश की हिंदी बोलने की लय बनी चुनौती

शरद के मुताबिक, यश हिंदी अच्छी तरह बोलते हैं, लेकिन उनकी मातृभाषा कन्नड़ होने के कारण कुछ संवादों में उच्चारण और शब्दों की लय का अंतर महसूस होता था। इसी वजह से टीम ने हिंदी संस्करण में अलग आवाज इस्तेमाल करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि यश ने कन्नड़ संस्करण में शानदार काम किया है और उनकी अपनी आवाज भी प्रभावशाली है।

डबिंग के दौरान यश के साथ तालमेल

शरद ने बताया कि यश डबिंग के काम में सक्रिय रूप से शामिल रहते थे। दोनों के बीच लंबे समय तक बातचीत होती थी और यश कई दृश्यों में बेहतर परिणाम के लिए सुझाव भी देते थे। शरद के अनुसार, दोनों का तालमेल अच्छा रहा और पूरी टीम एक ही दिशा में काम कर रही थी।

दस सिर वाले दृश्य की डबिंग रही खास

शरद केलकर ने फिल्म के कुछ दृश्यों को अपने पसंदीदा हिस्सों में शामिल किया। इनमें रावण के दस सिर वाला दृश्य, विद्युतजिह्वा से जुड़ा दृश्य और ब्रह्मा से वरदान मांगने वाला शुरुआती दृश्य प्रमुख हैं।

उन्होंने बताया कि दस सिर वाले दृश्य की डबिंग में तीन घंटे से ज्यादा समय लगा। इसमें अलग-अलग सिरों के संवाद, उनकी गति और आवाज के उतार-चढ़ाव को संभालना किसी एक किरदार के बजाय कई किरदारों को आवाज देने जैसा था।

शरद ने यह भी बताया कि डबिंग को पर्दे पर दिख रहे दृश्यों के अनुरूप बनाने के लिए वह अपनी पूरी शारीरिक ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं। एक्शन या दौड़ने वाले दृश्यों में वह स्टूडियो के भीतर भी उसी तरह की शारीरिक गतिविधियां करते हैं, ताकि आवाज में वास्तविकता और सांसों का उतार-चढ़ाव महसूस हो सके।

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