Bhopal Master Plan 2047: 5 हजार से ज्यादा आपत्तियां, समयसीमा बढ़ाने की मांग से बढ़ी हलचल

Bhopal Master Plan 2047: 5 हजार आपत्तियां, समयसीमा बढ़ाने की मांग
भोपाल। राजधानी भोपाल के प्रस्तावित मास्टर प्लान-2047 को लेकर बहस तेज हो गई है। ड्राफ्ट पर अब तक 5 हजार से अधिक आपत्तियां और सुझाव मिलने की जानकारी सामने आई है। योजना के कई प्रावधानों को लेकर किसान, व्यापारी, पर्यावरणविद और रहवासी संगठन अपनी चिंताएं जता रहे हैं। इसी बीच लगातार छुट्टियों के कारण आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख को लेकर भी असमंजस की स्थिति बन गई है।
प्रभावित पक्षों का कहना है कि इतने बड़े शहर के भविष्य से जुड़ी योजना पर लोगों को पर्याप्त समय मिलना चाहिए, ताकि वे प्रस्तावों का अध्ययन करके अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकें।
छुट्टियों के बीच समयसीमा बढ़ाने की मांग
भोपाल मास्टर प्लान का प्रारूप 25 सितंबर 2026 को मध्यप्रदेश राजपत्र में प्रकाशित हुआ था। इस पर आपत्तियां और सुझाव देने के लिए 30 दिन का समय निर्धारित किया गया था। हालांकि, अंतिम तारीख के आसपास अवकाश पड़ने के कारण आवेदन जमा करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे।
पर्यावरणविद राशिद नूर खान, क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक और संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने समयसीमा स्पष्ट करने की मांग उठाई है। संबंधित पक्षों ने अंतिम तारीख 27 अक्टूबर तक बढ़ाने का आग्रह किया है, ताकि कार्यालय बंद रहने या ऑनलाइन आवेदन में तकनीकी दिक्कत आने से किसी की आपत्ति छूट न जाए।
फिलहाल समयसीमा बढ़ाने के अनुरोध पर विभाग का अंतिम निर्णय स्पष्ट नहीं है। ऐसे में नागरिकों के लिए आवेदन स्वीकार करने की निर्धारित तारीख और समय की आधिकारिक पुष्टि करना जरूरी है।
बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र पर सबसे ज्यादा चिंता
मास्टर प्लान के जिन मुद्दों पर सबसे ज्यादा आपत्तियां सामने आई हैं, उनमें बड़े तालाब का कैचमेंट क्षेत्र और भोजताल संरक्षण जोन प्रमुख हैं। किसानों और स्थानीय निवासियों को आशंका है कि प्रस्तावित भू-उपयोग और निर्माण संबंधी नियमों से उनकी जमीनों तथा मौजूदा संपत्तियों पर असर पड़ सकता है।
कुछ प्रभावित लोगों ने कैचमेंट क्षेत्र में निर्माण की अनुमति और अलग-अलग इलाकों के लिए प्रस्तावित नियमों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि योजना में बदलाव करते समय पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय निवासियों के हितों के बीच स्पष्ट संतुलन होना चाहिए।
हालांकि, किसी जमीन या मकान की कानूनी स्थिति पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित रिकॉर्ड और लागू नियमों की जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
कृषि भूमि के इस्तेमाल को लेकर किसानों का विरोध
मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में कृषि भूमि के प्रस्तावित उपयोग को लेकर भी किसानों ने आपत्ति जताई है। किसानों की मांग है कि खेती पर निर्भर परिवारों की आजीविका और जमीन के भविष्य को ध्यान में रखते हुए भू-उपयोग से जुड़े निर्णय लिए जाएं।
कुछ किसान समूहों ने भोजताल संरक्षण जोन-1 और जोन-2 के प्रावधानों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कृषि भूमि के इस्तेमाल में बदलाव से पहले प्रभावित किसानों और पंचायतों की बात सुनी जानी चाहिए।
किसानों और अन्य प्रभावित पक्षों की आपत्तियों पर सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ड्राफ्ट में किन प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाता है।
सड़क की चौड़ाई और जमीन के माप पर भी सवाल
आपत्तियों का एक बड़ा हिस्सा प्रस्तावित सड़कों की चौड़ाई, उनके अलाइनमेंट और जमीन के माप से जुड़ा है। कुछ निवासियों ने प्रस्तावित सड़क मार्गों में बदलाव की मांग की है, जबकि अन्य लोगों ने अपनी संपत्ति के क्षेत्रफल और प्रस्तावित भू-उपयोग में अंतर होने की शिकायत की है।
इन मुद्दों का समाधान जरूरी माना जा रहा है, क्योंकि मास्टर प्लान के आधार पर भविष्य में शहर के विस्तार, निर्माण अनुमतियों और भूमि विकास से जुड़े फैसले प्रभावित हो सकते हैं।
व्यापारियों ने भी रखीं अपनी मांगें
व्यापारिक संगठनों ने जमीन के व्यावसायिक उपयोग, कन्वर्जन फीस और फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) से जुड़े प्रावधानों पर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। व्यापारियों की मांग है कि व्यावसायिक उपयोग में बदलाव के लिए शुल्क और निर्माण संबंधी नियम स्पष्ट हों तथा पुराने बाजारों के कारोबारियों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
व्यापारियों का मानना है कि नियमों में स्पष्टता रहने से कारोबारी गतिविधियों और शहर के नियोजित विकास के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है।
आपत्तियों की छंटनी के बाद होगी सुनवाई
मास्टर प्लान पर आई आपत्तियों को पहले अलग-अलग श्रेणियों में व्यवस्थित करने और उनकी जांच करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस काम में करीब 15 दिन लग सकते हैं। इसके बाद संबंधित पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाने का कार्यक्रम जारी किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान नागरिकों, किसानों, व्यापारियों और अन्य प्रभावित लोगों की दलीलों पर विचार किया जाएगा। इसके बाद ही मास्टर प्लान-2047 के अंतिम स्वरूप और संभावित संशोधनों को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
भोपाल के भविष्य के लिए अहम है यह प्रक्रिया
मास्टर प्लान-2047 राजधानी के आने वाले वर्षों के विकास, भूमि उपयोग, सड़क नेटवर्क और निर्माण व्यवस्था की दिशा तय करने वाला दस्तावेज है। ऐसे में इस पर बड़ी संख्या में आपत्तियां आना बताता है कि योजना के कई प्रावधानों पर लोगों को स्पष्टीकरण चाहिए।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि विभाग समयसीमा को लेकर क्या निर्णय लेता है और सुनवाई के दौरान उठाए गए सवालों का समाधान किस तरह किया जाता है।

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