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दिग्विजय सिंह के बयान से सियासी हलचल, पीएम मोदी-आडवाणी और RSS की संगठन शक्ति की सराहना

By · December 27, 2025 · 7:32 pm · 7 min read

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के एक बयान और सोशल मीडिया पोस्ट ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी और आरएसएस-भाजपा की संगठनात्मक संरचना की कार्यशैली की सराहना की, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया।

दिग्विजय सिंह ने एक पुरानी तस्वीर साझा की, जिसमें युवा नरेंद्र मोदी जमीन पर बैठे हुए नजर आते हैं और लालकृष्ण आडवाणी कुर्सी पर बैठे दिखते हैं। इस तस्वीर को साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि यह दृश्य बताता है कि किस तरह एक मजबूत संगठन अपने कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने का अवसर देता है। उन्होंने इसे “संगठन की ताकत” का उदाहरण बताया।

इस टिप्पणी के सामने आते ही कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही खेमों में प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। भाजपा नेताओं ने इसे कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक कमजोरी पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी बताया, जबकि कांग्रेस समर्थकों के बीच इस बयान को लेकर असहजता देखी गई।

विवाद बढ़ने के बाद दिग्विजय सिंह ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य किसी विचारधारा या राजनीतिक नीतियों का समर्थन करना नहीं था, बल्कि केवल यह बताना था कि भाजपा-आरएसएस का संगठनात्मक ढांचा किस तरह कार्यकर्ताओं को नेतृत्व तक पहुंचाने में सक्षम बनाता है।
उन्होंने यह भी दोहराया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस की राजनीति से वैचारिक रूप से सहमत नहीं हैं और उनका विरोध पहले की तरह जारी है। उनके अनुसार, संगठन की कार्यशैली और राजनीतिक विचारधारा — दोनों को अलग-अलग देखा जाना चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और आंतरिक संरचना पर मंथन कर रही है। ऐसे में दिग्विजय सिंह की टिप्पणी को पार्टी के भीतर आत्ममंथन के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

कुल मिलाकर, दिग्विजय सिंह का यह बयान एक बार फिर यह दिखाता है कि भारतीय राजनीति में एक छोटी सी टिप्पणी भी बड़े राजनीतिक संदेश और विवाद का रूप ले सकती है।

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