नक्सलवाद का पतन: दस साल में 10,000 माओवादी मुख्यधारा में लौटे
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भारत में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में दिखाई दे रहा है। बीते दस वर्षों में 10,000 से अधिक माओवादी कैडर ने हथियार डालकर समाज की मुख्यधारा में वापसी की है।
सरकार की विकास योजनाओं, पुनर्वास नीतियों और सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई ने इस उग्रवाद को कमजोर कर दिया है।
- 2025 में ही 2,300 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके थे, जबकि 2026 के शुरुआती महीनों में 630 से अधिक कैडर हिंसा छोड़ चुके हैं।
- नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या घटकर अब 52 रह गई है, जो पहले 330 थी।
- केंद्र सरकार ने नक्सलवाद खत्म करने के लिए 31 मार्च को विशेष समीक्षा बैठक भी आयोजित की थी।
- शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार योजनाओं ने युवाओं को हिंसा से दूर कर मुख्यधारा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है।
🔑 मुख्य बिंदु
- दस वर्षों में 10,000 से अधिक माओवादी आत्मसमर्पण।
- नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 330 से घटकर 52।
- सरकार की पुनर्वास नीति और विकास योजनाओं का असर।
- सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से नक्सलवाद कमजोर।



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