13 साल की उम्र में ब्रेन स्ट्रोक का शिकार हुई किशोरी, शुरुआती लक्षणों को समझा गया सामान्य बीमारी

13 साल की किशोरी को ब्रेन स्ट्रोक, जानें शुरुआती लक्षण और बचाव
ब्रेन स्ट्रोक को आमतौर पर बुजुर्गों से जुड़ी बीमारी माना जाता है, लेकिन कम उम्र के बच्चे और युवा भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। ब्रिटेन की 13 वर्षीय मटिल्डा स्टेसी का मामला इसी बात की गंभीर याद दिलाता है। शुरुआत में उनके सिरदर्द, नाक बंद रहने और थकान जैसे लक्षणों को सामान्य संक्रमण समझा गया, लेकिन बाद में उनकी हालत तेजी से बिगड़ गई।
रिपोर्ट के अनुसार, मटिल्डा को साल 2024 की गर्मियों में लगातार सिरदर्द और कमजोरी महसूस होने लगी थी। शुरुआती जांच में इसे साइनस संक्रमण मानकर उपचार किया गया। हालांकि, कुछ समय बाद उन्हें खाना-पीना और सामान्य रूप से चलना-फिरना भी मुश्किल होने लगा। अस्पताल पहुंचने के बाद उनके पैर में सुन्नपन महसूस हुआ और फिर बोलने तथा शरीर की गतिविधियों पर भी असर पड़ने लगा।
जांच में सामने आया कि शरीर में हुआ संक्रमण मस्तिष्क तक पहुंच गया था, जिससे दिमाग में रक्त प्रवाह प्रभावित हुआ और स्ट्रोक की स्थिति पैदा हुई। मटिल्डा को करीब दो सप्ताह आईसीयू में रहना पड़ा और उनका अस्पताल में लगभग दो महीने तक इलाज चला। इसके बाद फिजियोथेरेपी और पुनर्वास की मदद से उनकी रिकवरी शुरू हुई। हालांकि, घटना के काफी समय बाद भी उन्हें चलने-फिरने में परेशानी बनी हुई है।
युवाओं में भी नजर आ रहे हैं स्ट्रोक के मामले
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और असंतुलित जीवनशैली स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकते हैं। बच्चों में इसके पीछे संक्रमण, रक्त के थक्के जमने की समस्या, हृदय संबंधी परेशानी और कुछ आनुवंशिक कारण भी हो सकते हैं।
भारत में ICMR के नेशनल स्ट्रोक रजिस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, दर्ज किए गए स्ट्रोक मरीजों में लगभग हर सातवां मरीज 18 से 44 वर्ष की उम्र का था। यह आंकड़ा बताता है कि इस बीमारी को केवल बुजुर्गों तक सीमित मानना सही नहीं है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अचानक शरीर के एक तरफ कमजोरी या सुन्नपन, चेहरे का एक तरफ झुकना, बोलने या समझने में परेशानी, नजर धुंधली होना, संतुलन बिगड़ना और अचानक तेज सिरदर्द स्ट्रोक के संभावित संकेत हो सकते हैं।
ऐसे लक्षण दिखाई देने पर इंतजार करने के बजाय तुरंत इमरजेंसी चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। स्ट्रोक के उपचार में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। शुरुआती पहचान और समय पर इलाज से गंभीर नुकसान और स्थायी दिव्यांगता का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है।




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