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अहोई अष्टमी आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, तारों के दर्शन का समय और व्रत की विधि

By · November 1, 2026 · 9:38 am · 9 min read

अहोई अष्टमी 2026: पूजा मुहूर्त, तारों के दर्शन का समय और व्रत विधि

अहोई अष्टमी का पर्व 1 नवंबर 2026, रविवार को मनाया जा रहा है। यह व्रत मुख्य रूप से संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। इस दिन माताएं अहोई माता की पूजा करती हैं और शाम को तारों के दर्शन करने के बाद व्रत का पारण करती हैं। उत्तर भारत में इस पर्व का विशेष महत्व है।

अहोई अष्टमी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 1 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 51 मिनट से शुरू हो रही है। इसका समापन 2 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर होगा।

नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार, अहोई अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 36 मिनट से 6 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। वहीं उज्जैन के लिए पूजा का मुहूर्त शाम 5 बजकर 44 मिनट से 7 बजकर 2 मिनट तक बताया गया है। पूजा का समय स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है।

तारों के दर्शन और चंद्रोदय का समय

अहोई अष्टमी पर शाम को तारों के दर्शन करना व्रत की महत्वपूर्ण परंपरा है। नई दिल्ली में तारों के दिखाई देने का अनुमानित समय शाम करीब 6 बजे है। तारों को देखकर अर्घ्य देने के बाद व्रत पूरा किया जाता है। कुछ परिवारों में चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा भी है।

नई दिल्ली के लिए 1 नवंबर को चंद्रोदय का समय रात करीब 11 बजकर 39 मिनट बताया गया है। हालांकि, तारों और चंद्रमा के दर्शन का समय शहर और मौसम के अनुसार बदल सकता है।

अहोई अष्टमी की पूजा विधि

सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद घर के पूजा स्थल की सफाई करके अहोई माता का चित्र या पारंपरिक आकृति स्थापित की जाती है। पूजा के लिए चौकी पर लाल या साफ कपड़ा बिछाया जाता है। इसके बाद माता को रोली, अक्षत, फूल और माला अर्पित की जाती है।

शाम के समय दीपक जलाकर अहोई माता की पूजा की जाती है और व्रत कथा सुनी या पढ़ी जाती है। पूजा के बाद तारों के दर्शन करके जल अर्पित किया जाता है। इसके बाद परिवार की परंपरा के अनुसार व्रत का पारण किया जाता है।

पूजा के लिए जरूरी सामग्री

अहोई अष्टमी की पूजा में अहोई माता का चित्र, लकड़ी की चौकी, लाल कपड़ा, कलश, रोली, अक्षत, फूल, माला, दीपक, धूप, फल और मिठाई रखी जाती है। इसके अलावा जल से भरा पात्र और पूजा में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री भी तैयार रखनी चाहिए।

व्रत के दौरान किन बातों का रखें ध्यान?

परंपरागत रूप से कई महिलाएं अहोई अष्टमी पर सूर्योदय से लेकर तारों के दर्शन तक निर्जला व्रत रखती हैं। हालांकि, व्रत रखने के नियम परिवार और क्षेत्र की परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर अपनी सेहत को प्राथमिकता देना जरूरी है।

धार्मिक मान्यता है कि अहोई माता की पूजा और व्रत कथा सुनने से संतान के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है। यह पर्व मां और संतान के बीच प्रेम, विश्वास और आशीर्वाद के भाव को दर्शाता है।

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