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West Asia Crisis: ‘युद्ध का युग नहीं, संवाद का रास्ता चुनें’, लोकसभा में पीएम मोदी का बड़ा बयान; तेल और सुरक्षा पर दिया भरोसा

By · March 23, 2026 · 3:09 pm · 8 min read

पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव और युद्ध की आहट के बीच आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में देश को संबोधित किया। संसद के बजट सत्र के दौरान पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय संकट पर भारत का पक्ष रखते हुए देशवासियों को ऊर्जा सुरक्षा और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का भरोसा दिलाया।

​भारतीयों की सुरक्षा हमारी टॉप प्रायोरिटी

​सदन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि खाड़ी देशों में रहने वाले लगभग 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सरकार के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्रालय और सभी दूतावासों को 24/7 अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा सके।

​पीएम मोदी के संबोधन की 10 बड़ी बातें (Key Highlights):

​प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में इन बिंदुओं पर विशेष जोर दिया:

  • ​संवाद ही रास्ता: “यह युग युद्ध का नहीं है। भारत हमेशा शांति के पक्ष में रहा है और संवाद (Dialogue) ही हर समस्या का समाधान है।”
  • ​ऊर्जा सुरक्षा: “वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है, लेकिन भारत के पास पर्याप्त स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व मौजूद है। घबराने की जरूरत नहीं है।”
  • ​हॉर्मुज जलडमरूमध्य: “होर्मुज का रास्ता वैश्विक व्यापार के लिए अहम है। हम वैकल्पिक समुद्री मार्गों और कूटनीतिक रास्तों पर काम कर रहे हैं।”
  • ​महंगाई पर लगाम: “राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि इस संकट की आड़ में खाद या अन्य वस्तुओं की जमाखोरी करने वालों पर सख्त कार्रवाई करें।”
  • ​नौसेना की मुस्तैदी: “हिंद महासागर में भारतीय नौसेना व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।”
  • ​आयात की विविधता: “अब हम तेल के लिए केवल एक क्षेत्र पर निर्भर नहीं हैं। भारत 41 देशों से तेल आयात कर रहा है।”
  • ​किसानों को राहत: “खाद की सप्लाई सुनिश्चित की गई है, ताकि अंतरराष्ट्रीय संकट का असर भारतीय खेती पर न पड़े।”
  • ​विश्व मित्र की भूमिका: “भारत दोनों पक्षों के संपर्क में है और तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।”
  • ​आत्मनिर्भरता: “यह संकट हमें याद दिलाता है कि हमें ग्रीन एनर्जी और रिन्यूएबल स्रोतों की ओर तेजी से बढ़ना होगा।”
  • ​एकजुटता की अपील: “राष्ट्रीय सुरक्षा के इस गंभीर मुद्दे पर मैं पूरे सदन और देश से एकजुट रहने की अपील करता हूँ।”
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