यूक्रेन युद्ध से रूस की अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव, पुतिन सरकार ला रही नए टैक्स

यूक्रेन युद्ध से रूस पर आर्थिक दबाव, पुतिन सरकार ला रही नए टैक्स
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का असर अब रूस की सरकारी वित्तीय व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। सैन्य खर्च बढ़ने, आर्थिक विकास की धीमी रफ्तार और पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूसी सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए नए कर उपायों पर विचार कर रही है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सरकार के सामने एक ओर युद्ध का खर्च उठाने की चुनौती है, तो दूसरी ओर आम लोगों और कारोबार पर बढ़ते आर्थिक दबाव को संभालना भी जरूरी है।
रूस का बजट घाटा बढ़कर 5.8 ट्रिलियन रूबल पहुंचा
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2026 तक रूस का बजट घाटा 5.8 ट्रिलियन रूबल यानी करीब 72 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। यह पिछले साल की समान अवधि के आंकड़े से लगभग 50 प्रतिशत अधिक था और सरकार के संशोधित लक्ष्य से भी ऊपर था।
रूस की अर्थव्यवस्था पर पश्चिमी प्रतिबंधों, गैर-सैन्य कंपनियों के लिए ऊंची ब्याज दरों, श्रमिकों की कमी और तेल रिफाइनरियों तथा निर्यात केंद्रों पर यूक्रेनी हमलों का भी असर पड़ रहा है। इन परिस्थितियों में सरकार के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाना महत्वपूर्ण हो गया है।
किन क्षेत्रों पर बढ़ सकता है टैक्स?
सरकार के 2027 से 2029 के बजट प्रस्तावों में कई नए कर उपाय शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित प्रस्ताव हैं:
- खनन कंपनियां: लौह अयस्क, निकेल और सोने जैसी वस्तुओं से जुड़ी कंपनियों पर असाधारण मुनाफे के लिए 20 से 30 प्रतिशत तक टैक्स लगाने का प्रस्ताव है।
- निवेश से होने वाली आय: ब्याज, डिविडेंड और संपत्ति की बिक्री से मिलने वाली कुछ आय पर टैक्स दरें बढ़ाकर 13 से 22 प्रतिशत करने की योजना है।
- विदेशी ऑनलाइन खरीदारी: 200 यूरो से कम मूल्य के कुछ विदेशी ऑनलाइन ऑर्डर पर 22 प्रतिशत वैट और प्रति पार्सल 100 रूबल शुल्क लगाने का प्रस्ताव है।
- विदेशी निवेशकों के खाते: कुछ प्रतिबंधित खातों में दिए जाने वाले डिविडेंड पर 35 प्रतिशत टैक्स लगाने की योजना भी शामिल है।
ये उपाय बजट प्रस्तावों का हिस्सा हैं और इन्हें लागू करने की स्थिति तथा समयसीमा संबंधित सरकारी निर्णयों पर निर्भर करेगी।
युद्ध खर्च के कारण नागरिक विकास पर दबाव
विशेषज्ञों के अनुसार, रूस के पास निकट भविष्य में बजट घाटे की भरपाई के लिए कुछ वित्तीय विकल्प मौजूद हैं। हालांकि, अधिक टैक्स और घरेलू उधारी पर निर्भरता से आम लोगों और कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है। इससे बुनियादी ढांचे और गैर-सैन्य विकास के लिए उपलब्ध धन पर भी दबाव पड़ सकता है।
पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रूस के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों से कर्ज जुटाना कठिन है। वहीं, देश के नेशनल वेल्थ फंड की आसानी से इस्तेमाल की जा सकने वाली संपत्तियां भी सीमित हो गई हैं।
क्या रूस वित्तीय संकट की ओर बढ़ रहा है?
रिपोर्ट के मुताबिक, रूस तत्काल वित्तीय संकट में नहीं है और सरकार के पास निकट भविष्य में घाटे की भरपाई के विकल्प हैं। लेकिन अर्थव्यवस्था का सैन्य क्षेत्र पर अधिक निर्भर होना और वित्तीय संसाधनों का सीमित होना लंबी अवधि में चुनौती बन सकता है।
यदि ऊर्जा की वैश्विक कीमतों में तेज गिरावट आती है या वित्तीय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है, तो रूस के बजट पर दबाव और बढ़ सकता है। फिलहाल, सरकार के सामने युद्ध खर्च और नागरिक अर्थव्यवस्था की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती है।




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