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उज्जैन: सिंहस्थ फ्लाईओवर के रास्ते में आई फलादिया मस्जिद, 224 वर्ग मीटर हिस्से को लेकर निगम का नोटिस

By · October 28, 2026 · 11:25 am · 8 min read

उज्जैन: फलादिया मस्जिद को निगम का नोटिस, फ्लाईओवर में 224 वर्ग मीटर बाधक

मध्य प्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत बन रहे एलिवेटेड फ्लाईओवर को लेकर एक नया मामला सामने आया है। एटलस चौराहे के पास नई सड़क पर स्थित फलादिया मस्जिद के प्रबंधन को नगर निगम ने नोटिस जारी किया है। निगम के अनुसार, प्रस्तावित फ्लाईओवर के एलाइनमेंट में मस्जिद के भूतल का 224 वर्ग मीटर हिस्सा बाधा बन रहा है।

फ्लाईओवर के एलाइनमेंट में आ रहा हिस्सा

नगर निगम के मुताबिक, चिमनगंज मंडी के इंदिरा नगर चौराहे से इंदौर गेट तक चार लेन और निकास चौराहे से इंदौर गेट तक दो लेन का एलिवेटेड फ्लाईओवर बनाया जाना है। इसी परियोजना के निर्धारित एलाइनमेंट में फलादिया मस्जिद का कुछ हिस्सा आ रहा है।

नोटिस में मस्जिद के भूतल पर 16 मीटर चौड़ाई और 14 मीटर गहराई वाले हिस्से का उल्लेख किया गया है। इसका कुल क्षेत्रफल 224 वर्ग मीटर बताया गया है। निगम ने इस मामले में मस्जिद प्रबंधन से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने और अपना पक्ष रखने को कहा है।

मस्जिद प्रबंधन ने बताया करीब 100 साल पुराना

मस्जिद के कोषाध्यक्ष मोहम्मद याहया के अनुसार, फलादिया मस्जिद करीब 100 साल पुरानी है और नई सड़क क्षेत्र की पहचान रही है। उन्होंने कहा कि नगर निगम की ओर से मांगे गए दस्तावेज सुनवाई के दौरान पेश किए जाएंगे।

स्थानीय निवासी मोहम्मद ऐजाज के मुताबिक, मस्जिद परिसर में करीब छह दुकानें भी हैं। ये दुकानें लगभग 60 से 70 साल पुरानी बताई गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन दुकानों से कई परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है और इन्हें हटाए जाने पर रोजगार प्रभावित हो सकता है।

दस्तावेजों की जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई

नगर निगम के जोन क्रमांक-3 के भवन अधिकारी की ओर से 23 अक्टूबर को नोटिस जारी किया गया था। इसमें लोक निर्माण विभाग के 14 अक्टूबर 2026 के पत्र का हवाला दिया गया है। प्रबंधन को 27 अक्टूबर को निगम मुख्यालय में दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया था।

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, मस्जिद के हिस्से पर आगे क्या कार्रवाई होगी, यह दस्तावेजों की जांच और संबंधित प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगा। नोटिस जारी होने को अंतिम कार्रवाई का आदेश नहीं माना जाना चाहिए।

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