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Business News: IMF की भारत को सलाह, रुपये को बाजार के अनुसार चलने दें; ECB प्रमुख लगार्ड देंगी इस्तीफा

By · October 30, 2026 · 11:28 am · 9 min read

IMF की भारत को सलाह: रुपये को बाजार के अनुसार चलने दें, लगार्ड देंगी इस्तीफा

30 अक्टूबर 2026 को वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारतीय वित्तीय बाजार से जुड़ी कई अहम खबरें सामने आई हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत को सलाह दी है कि ऊर्जा संकट जैसे बाहरी झटकों से निपटने के लिए रुपये की विनिमय दर को बाजार के अनुसार समायोजित होने दिया जाए। वहीं, यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की अध्यक्ष क्रिस्टीन लगार्ड ने फरवरी 2027 में अपना पद छोड़ने की घोषणा की है।

IMF ने रुपये को लेकर क्या सलाह दी?

IMF की कम्युनिकेशन डायरेक्टर जूली कोजैक ने कहा कि ऊर्जा से जुड़े वैश्विक झटकों के सामने रुपये को पहली सुरक्षा पंक्ति के रूप में काम करने देना चाहिए। उनका कहना है कि विनिमय दर को बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बदलने की अनुमति देने से भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहरी दबावों के अनुकूल ढलने में मदद मिल सकती है।

यह बयान ऐसे समय आया है, जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव और महंगे कच्चे तेल के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है। IMF ने यह भी कहा कि यदि रुपये में गिरावट के कारण देश में व्यापक महंगाई बढ़ने लगे, तो मौद्रिक नीति को सख्त करने पर विचार किया जा सकता है।

RBI के विदेशी मुद्रा बाजार के कदम चर्चा में

रुपये में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने अक्टूबर में कई कदम उठाए थे। इनमें सरकारी तेल कंपनियों की डॉलर जरूरतों के लिए विशेष व्यवस्था और विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कारोबार पर कुछ प्रतिबंध शामिल हैं।

RBI ने इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियों के लिए विशेष डॉलर विंडो शुरू की थी। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा बाजार में जोखिम प्रबंधन और सट्टा कारोबार को नियंत्रित करने के लिए भी नियमों में बदलाव किए गए।

क्रिस्टीन लगार्ड 7 फरवरी 2027 को छोड़ेंगी पद

यूरोपीय सेंट्रल बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लगार्ड ने 29 अक्टूबर को घोषणा की कि वह 7 फरवरी 2027 को अपना पद छोड़ देंगी। उनका कार्यकाल अक्टूबर 2027 तक निर्धारित था, लेकिन उन्होंने इससे पहले पद छोड़ने का फैसला किया है।

ECB की आधिकारिक घोषणा के मुताबिक, उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति यूरोपीय परिषद की प्रक्रिया के तहत की जाएगी। लगार्ड नवंबर 2019 से ECB का नेतृत्व कर रही हैं। उन्होंने इससे पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रमुख के रूप में भी काम किया था।

कच्चे तेल की कीमतें और महंगाई पर नजर

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने और रुपये के कमजोर होने से आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर परिवहन, उत्पादन लागत और महंगाई पर भी पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां रुपये की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण कारक रहेंगे।

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