बिजनेस अपडेट: राज्यों को 1.09 लाख करोड़ रुपये जारी, कपास का शुल्क मुक्त आयात अब 31 दिसंबर तक

केंद्र ने राज्यों को 1.09 लाख करोड़ दिए, कपास आयात छूट बढ़ी
केंद्र सरकार ने राज्यों को अतिरिक्त कर हस्तांतरण के रूप में 1,09,019 करोड़ रुपये जारी किए हैं। यह राशि नियमित मासिक टैक्स हस्तांतरण से अलग है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में यह दूसरी अतिरिक्त किस्त है। सरकार ने यह रकम राज्यों को विकास कार्यों, पूंजीगत खर्च और कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च करने में मदद देने के उद्देश्य से जारी की है।
इस राशि में उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक 19,208 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके अलावा बिहार को 10,845 करोड़ रुपये, छत्तीसगढ़ को 3,602 करोड़ रुपये, असम को 3,552 करोड़ रुपये और पंजाब को 2,176 करोड़ रुपये दिए गए हैं। हरियाणा को 1,484 करोड़ रुपये, उत्तराखंड को 1,244 करोड़ रुपये और हिमाचल प्रदेश को 996 करोड़ रुपये मिले हैं।
राज्यों को क्यों जारी की गई अतिरिक्त राशि?
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, अतिरिक्त धनराशि से राज्य सरकारें विकास और कल्याणकारी योजनाओं के लिए खर्च की व्यवस्था बेहतर कर सकेंगी। साथ ही पूंजीगत परियोजनाओं पर काम में तेजी लाने में भी मदद मिलेगी।
वर्तमान व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार द्वारा एक वित्त वर्ष में एकत्र किए गए करों का 41 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को 14 किस्तों में दिया जाता है। नियमित हस्तांतरण के अलावा जारी की गई यह अतिरिक्त राशि राज्यों के वित्तीय संसाधनों को मजबूत करने के लिए है।
कपास का शुल्क मुक्त आयात अब 31 दिसंबर तक
केंद्र सरकार ने घरेलू कपड़ा उद्योग को राहत देते हुए कपास के आयात पर सीमा शुल्क छूट की अवधि दो महीने बढ़ा दी है। अब कपास का शुल्क मुक्त आयात 31 दिसंबर 2026 तक किया जा सकेगा। इससे पहले यह छूट 31 अक्टूबर तक लागू थी।
सरकार ने मई 2026 में कपास आयात पर लगने वाले 11 प्रतिशत सीमा शुल्क को अस्थायी रूप से हटाया था। अब इस व्यवस्था को दो महीने और जारी रखने का फैसला किया गया है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में कपास की उपलब्धता बढ़ाना और कपड़ा निर्माताओं की कच्चे माल की लागत को कम करने में मदद करना है।
कपड़ा कंपनियों और उपभोक्ताओं को राहत की उम्मीद
कपास की कीमतें और उपलब्धता कपड़ा तथा परिधान उद्योग की लागत को सीधे प्रभावित करती हैं। शुल्क छूट जारी रहने से कंपनियों को विदेशों से कपास खरीदने में अधिक सुविधा मिल सकती है। इससे उत्पादन लागत पर दबाव कम होने और छोटे तथा मध्यम उद्योगों को मदद मिलने की उम्मीद है।
सरकार का कहना है कि इस फैसले से घरेलू कपड़ा उद्योग को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कच्चा माल मिल सकेगा। हालांकि, इसका वास्तविक असर आयात की मात्रा, अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों और घरेलू कपास की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।




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