Diwali 2026: लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदते समय रखें इन 5 बातों का ध्यान, जानें कैसी होनी चाहिए प्रतिमा

Diwali 2026: लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदते समय ध्यान रखें ये 5 बातें
दिवाली का त्योहार मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के बिना अधूरा माना जाता है। इस दिन घरों में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ दोनों देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। दिवाली से पहले बाजारों में लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की खरीदारी शुरू हो जाती है। ऐसे में प्रतिमा खरीदते समय उसके स्वरूप, मुद्रा और बनावट से जुड़ी कुछ पारंपरिक मान्यताओं का ध्यान रखा जाता है।
लक्ष्मी और गणेश की अलग-अलग मूर्तियां खरीदने की मान्यता
कई धार्मिक परंपराओं में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की अलग-अलग प्रतिमाएं खरीदने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि दोनों को अलग-अलग आसन पर स्थापित करके पूजा करना उचित रहता है। हालांकि, कुछ बाजारों में एक ही आधार पर बनी संयुक्त मूर्तियां भी मिलती हैं। इस मामले में परिवार की परंपरा के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है।
गणेश जी की सूंड और मूषक का रखें ध्यान
भगवान गणेश की प्रतिमा खरीदते समय उनकी सूंड की दिशा पर विशेष ध्यान दिया जाता है। घर में पूजा के लिए सामान्य रूप से बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी यानी वाममुखी गणेश की प्रतिमा पसंद की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसे गृहस्थों के लिए शुभ माना जाता है।
इसके अलावा प्रतिमा में भगवान गणेश के हाथ में मोदक और उनके वाहन मूषक का स्वरूप भी देखा जाता है। मोदक को आनंद और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।
कमल पर विराजमान हों मां लक्ष्मी
मां लक्ष्मी की प्रतिमा में कमल का आसन विशेष महत्व रखता है। कमल को पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। कई परंपराओं में ऐसी प्रतिमा को प्राथमिकता दी जाती है जिसमें मां लक्ष्मी कमल पर विराजमान हों और उनके हाथ से सोने के सिक्कों की वर्षा हो रही हो।
मां लक्ष्मी की शांत और प्रसन्न मुद्रा वाली प्रतिमा खरीदना भी शुभ माना जाता है। कुछ मान्यताओं में बैठी हुई मुद्रा वाली प्रतिमा को दिवाली की घरेलू पूजा के लिए प्राथमिकता दी जाती है।
मिट्टी की मूर्ति को दें प्राथमिकता
दिवाली की वार्षिक पूजा के लिए मिट्टी से बनी प्रतिमाएं पारंपरिक रूप से पसंद की जाती हैं। ये पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर विकल्प हो सकती हैं, बशर्ते इनमें हानिकारक रंगों और सामग्री का इस्तेमाल न किया गया हो। पीतल, चांदी और अन्य धातुओं की प्रतिमाएं भी खरीदी जा सकती हैं, जिन्हें लंबे समय तक घर के मंदिर में रखा जा सकता है।
खरीदने से पहले प्रतिमा की जांच जरूर करें
मूर्ति खरीदते समय यह देखना जरूरी है कि उसमें कोई दरार, टूटा हुआ हिस्सा या खराब बनावट न हो। प्रतिमा के हाथ, पैर, मुकुट और आधार सही स्थिति में होने चाहिए। रंगों की गुणवत्ता और मूर्ति का आकार भी जांच लें, ताकि उसे घर के पूजा स्थल पर आसानी से स्थापित किया जा सके।
दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा खरीदते समय सबसे महत्वपूर्ण बात अपनी श्रद्धा, पारिवारिक परंपरा और पूजा स्थल की व्यवस्था को ध्यान में रखना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रतिमा का चयन किया जा सकता है, लेकिन इन्हें सभी परिवारों के लिए अनिवार्य नियम नहीं समझना चाहिए।




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