दिल्ली-NCR के प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता, पराली के साथ वाहनों से निकलने वाले धुएं पर भी उठाए सवाल

दिल्ली-NCR प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता, वाहनों और पराली पर उठाए सवाल
नई दिल्ली। दिल्ली-NCR में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान चिंता जताई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि प्रदूषण की समस्या को केवल पराली जलाने तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। वाहनों से निकलने वाला धुआं और शहरी क्षेत्रों में बढ़ता प्रदूषण भी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने दिल्ली की सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक और आसपास के शहरों से आने-जाने वाले वाहनों की बड़ी संख्या पर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली को गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और ग्रेटर नोएडा से जोड़ने वाली सड़कों पर लगातार भारी यातायात दिखाई देता है। अदालत ने प्रदूषण रोकने के लिए तत्काल, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक उपायों की आवश्यकता बताई।
पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। सुनवाई के दौरान न्यायमित्र और वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने बताया कि प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी के आसपास बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से दिल्ली के प्रदूषण में करीब 14 प्रतिशत योगदान होने की बात सामने आई है। हालांकि, राजधानी में पहले से मौजूद प्रदूषण और स्थानीय स्रोतों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
किसानों को पराली प्रबंधन की सुविधाएं देने पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसानों को फसल अवशेष यानी पराली के प्रबंधन के लिए जरूरी मशीनें और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। अदालत ने सुझाव दिया कि पराली खरीदने की दर पहले से घोषित होनी चाहिए, ताकि किसानों को समय रहते जानकारी मिल सके। ग्राम पंचायतों को भी ऐसी व्यवस्था से जोड़ने की बात कही गई, जिससे छोटे किसानों तक मशीनों की पहुंच आसान हो सके।
वाहनों और शहरी प्रदूषण पर भी कार्रवाई जरूरी
सुनवाई में अदालत ने निजी और बड़ी गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण पर भी सवाल उठाए। केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इनमें कुछ श्रेणियों के वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध, पीयूसी प्रमाणपत्रों की जियो-टैगिंग और visibly प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ शिकायतों के आधार पर कार्रवाई शामिल है।
अदालत ने स्कूलों को बंद करने या हाइब्रिड मोड में चलाने से जुड़ी मांग पर भी विशेषज्ञों की राय के आधार पर विचार करने की बात कही। मामले में आगे की सुनवाई 16 नवंबर को होगी।




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