सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: 60 साल पुराने BBMB बिजली विवाद का अंत, हिमाचल को मिलेंगी 11,973 मिलियन यूनिट बिजली

BBMB विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, हिमाचल को मिलेगी 11,973 MU बिजली
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के बीच भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) की परियोजनाओं से जुड़े दशकों पुराने बिजली विवाद पर फैसला सुना दिया है। अदालत के निर्णय के अनुसार, पंजाब और हरियाणा अगले 20 वर्षों में हिमाचल प्रदेश को 11,973 मिलियन यूनिट बिजली देंगे। इस फैसले के साथ करीब छह दशक से चले आ रहे विवाद के समाधान का रास्ता साफ हो गया है।
नकद नहीं, बिजली के रूप में मिलेगा बकाया
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव को स्वीकार किया है। इसके तहत हिमाचल प्रदेश को पुराने बकाये का भुगतान नकद राशि के बजाय बिजली के रूप में किया जाएगा। यह हिसाब वर्ष 1966 से जुड़े बकाये के आधार पर तय किया गया है।
इस व्यवस्था के अनुसार पंजाब और हरियाणा को निर्धारित अवधि में हिमाचल प्रदेश को बिजली उपलब्ध करानी होगी। इससे लंबे समय से अटके बिजली बकाये के निपटारे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
2011 में तय हुआ था राज्यों का बिजली हिस्सा
BBMB परियोजनाओं में राज्यों की हिस्सेदारी को लेकर विवाद पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के बाद से चला आ रहा था। हिमाचल प्रदेश ने अपने हिस्से के अधिकार को लेकर 1996 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
27 सितंबर 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश का बिजली हिस्सा 7.19 प्रतिशत निर्धारित किया था। इसी फैसले में पंजाब का हिस्सा 51.80 प्रतिशत और हरियाणा का 37.51 प्रतिशत तय किया गया था। चंडीगढ़ की हिस्सेदारी 3.50 प्रतिशत निर्धारित हुई थी।
लंबे विवाद के बाद राज्यों को मिली स्पष्ट व्यवस्था
हिमाचल प्रदेश का दावा था कि BBMB की परियोजनाओं से मिलने वाले उसके हिस्से का पूरा लाभ नहीं मिला है। इसी को लेकर राज्यों के बीच लंबे समय तक कानूनी और प्रशासनिक विवाद चलता रहा।
अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले में 11,973 मिलियन यूनिट बिजली अगले 20 वर्षों में देने की व्यवस्था तय की गई है। इससे हिमाचल प्रदेश को पुराने बकाये के भुगतान का रास्ता मिलेगा और राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऊर्जा विवाद को सुलझाने में मदद मिलेगी।




Leave a Reply